रविवार, 18 अगस्त 2013

खेल बनाते हमको महान



अलग-अलग सबके हैं खेल
कई खेले जाते ऐसे जैसे तेज रेल
खेलो फुटबाल खेलो क्रिकेट
मारो गोल उड़ा दो विकेट
खेल के होते कई प्रकार
खेल में होती जीत और हार
बड़े होकर हम खिलाडी बन जायेगें
अपनी टीम को जिताएंगे
खेल कूद कर ही तो बढ़ेंगे
माँ-पिताजी के रास्ते पर चलेंगे
खेलों का दिल में रखो मान
खेल बनाते हमको महान !

(c) अनमोल दूबे

रविवार, 14 अप्रैल 2013

वसंत

ची-ची करती चिड़िया आई
वसंत आया शरद की हुई विदाई

मोटे गरम कपड़े भीतर रख दो
अलाव को अब ठंडा कर दो

रंग-बिरंगे वस्त्र पहन लो
प्रकृति के रंगों से होली खेलो

सरस्वती देवी का वंदन कर लो
ज्ञान प्रकाश जीवन में भर लो

पौधों में कलियाँ खिली-खिली हैं
सुगंध उपवन में बिखरी-बिखरी है

भौरे मंडराते कमल-दल पर
तितलियाँ उड़ती जाती हैं फूलों पर

वसंत  में बह रही है पुरवाई
जन मन को यह है सुखदाई

चिड़ियों का संदेशा सुन लो
वसंत जैसा सुन्दर जीवन कर लो |

(C) अनमोल दुबे
 

गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

वर्षा



उछले मेढक, उछले मोर
अब आया वर्षा का जोर
वर्षा देती जीवन पेड़ों को
मजा देती छोटे बच्चों को

देखो-देखो वर्षा आई
फूलों पर कलियाँ आई
टर्र-टर्र करते मेढक
पानी से भरी हुई सड़क

मोर ने मोरनी को समझाया
देखो बारिश ने मजा दिलाया
वर्षा-ऋतु होती है मजेदार
चाय-पकौड़े होते लिज्जतदार|

(c) अनमोल दुबे